ताज़ा खबर:
भारत ने अंतरिक्ष में नया कीर्तिमान बनाया  ❯  संसद में बजट सत्र शुरू  ❯  भारत ने क्रिकेट विश्वकप जीता  ❯  शेयर बाजार नई ऊंचाई पर  ❯  नई शिक्षा नीति लागू  ❯  कैंसर की नई दवा तैयार
अच्छाशब्द
Google Ad 728×60
स्वास्थ्य
1 अक्टूबर 2026

भोपाल में 70+ का हर चौथा बुजुर्ग ‘सूने घर’ में:रिटायर्ड आईएएस की हत्या के बाद 17 बूथों की वोटर लिस्ट खंगाली, 210 ऐसे मकान मिले

पुलिस के पास ये डेटा नहीं रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल की हत्या ने भोपाल में बुजुर्गों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि 70+ उम्र का हर चौथा बुजुर्ग ऐसे ‘सूने घर’ में रह रहा है, जहां 60 साल से कम उम्र का कोई मतदाता दर्ज नहीं है। पढ़ाई और रोजगार के लिए बच्चों के दूसरे शहरों या विदेश जाने से बुजुर्ग दंपती पीछे छूट रहे हैं। भास्कर ने अरेरा कॉलोनी, साकेत नगर और ईदगाह हिल्स, शाहजहांनाबाद के 17 मतदान केंद्रों की सूचियां खंगालीं। इनमें 13,253 वोटर्स में 1,127 की उम्र 70 साल या इससे अधिक है। इनमें 274 यानी 24.3% बुजुर्ग ऐसे 210 मकानों में रहते हैं, जहां 60 साल से कम उम्र का एक भी वोटर दर्ज नहीं है। सबसे अहम यह कि भोपाल पुलिस के पास ऐसे घरों का अलग डेटा ही नहीं है। पुलिस के वरिष्ठ नागरिक सेल में पूरे शहर से सिर्फ 172 बुजुर्ग पंजीकृत हैं, जबकि भास्कर को महज 17 बूथों में ही ऐसे 210 मकान मिले। ऐसे घरों में बुजुर्गों को केयरटेकर, घरेलू सहायक या दूसरी बाहरी मदद लेनी पड़ सकती है। शेष | पेज 10 पर 2036 तक मप्र में हर आठवां व्यक्ति होगा बुजुर्ग : यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (यूएनएफपीए) और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (आईआईपीएस) की ‘इंडिया एजिंग रिपोर्ट’ के मुताबिक 2036 तक मध्यप्रदेश की आबादी में 60+ लोगों की हिस्सेदारी 12.8% हो जाएगी। यानी लगभग हर आठवां व्यक्ति बुजुर्ग होगा। रिपोर्ट में युवाओं के बड़े शहरों और विदेश जाने से बुजुर्गों के पारंपरिक पारिवारिक सहारे पर पड़ रहे असर का भी जिक्र है। ‘लासी’ और एनएसएसओ के सर्वे भी अकेले या केवल बुजुर्ग सदस्यों वाले परिवार बढ़ने की ओर संकेत करते हैं। देश में 60+ उम्र के 35.4% बुजुर्ग ‘एम्प्टी नेस्ट’ श्रेणी में हैं, जबकि शहरी मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 31.4% है। मप्र में बुजुर्गों का हाल उच्च रक्तचाप 31.5% मधुमेह से पीड़ित 18.7% बुजुर्गों को दो बीमारियां 38.2% स्वास्थ्य बीमा नहीं 74% महिलाएं दूसरों पर निर्भर 46% प्रतिमाह 3800, 6500 का खर्च दवाओं पर (इंडिया एजिंग रिपोर्ट के अनुसार) पहले ऐसे घर पहचानें, फिर मदद का नेटवर्क बनाएं... मतदाता सूची के आधार पर पूरे शहर में ऐसे घर चिह्नित किए जा सकते हैं। पुलिस, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग इनका रिकॉर्ड तैयार करें। बुजुर्गों की सहमति से परिजन का संपर्क नंबर लेकर उन्हें नजदीकी अस्पताल, एंबुलेंस, पुलिस, कॉलोनी समिति से जोड़ा जाए। इससे वार्ड स्तर पर ऐसा नेटवर्क बन सकेगा, जो आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाए।, प्रो. आशा शुक्ला, समाजशास्त्री, पूर्व कुलगुरु बीआर आंबेडकर विवि, महू अरेरा, साकेत नगर और ईदगाह हिल्स में ये स्थिति

म
मनोज जोशी
1 अक्टूबर 2026
भोपाल में 70+ का हर चौथा बुजुर्ग ‘सूने घर’ में:रिटायर्ड आईएएस की हत्या के बाद 17 बूथों की वोटर लिस्ट खंगाली, 210 ऐसे मकान मिले
#dainikbhaskar
लेख सारांश

पुलिस के पास ये डेटा नहीं रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल की हत्या ने भोपाल में बुजुर्गों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि 70+ उम्र का हर चौथा बुजुर्ग ऐसे ‘सूने घर’ में रह रहा है, जहां 60 साल से कम उम्र का कोई मतदाता दर्ज नहीं है। पढ़ाई और रोजगार के लिए बच्चों के दूसरे शहरों या विदेश जाने से बुजुर्ग दंपती पीछे छूट रहे हैं। भास्कर ने अरेरा कॉलोनी, साकेत नगर और ईदगाह हिल्स, शाहजहांनाबाद के 17 मतदान केंद्रों की सूचियां खंगालीं। इनमें 13,253 वोटर्स में 1,127 की उम्र 70 साल या इससे अधिक है। इनमें 274 यानी 24.3% बुजुर्ग ऐसे 210 मकानों में रहते हैं, जहां 60 साल से कम उम्र का एक भी वोटर दर्ज नहीं है। सबसे अहम यह कि भोपाल पुलिस के पास ऐसे घरों का अलग डेटा ही नहीं है। पुलिस के वरिष्ठ नागरिक सेल में पूरे शहर से सिर्फ 172 बुजुर्ग पंजीकृत हैं, जबकि भास्कर को महज 17 बूथों में ही ऐसे 210 मकान मिले। ऐसे घरों में बुजुर्गों को केयरटेकर, घरेलू सहायक या दूसरी बाहरी मदद लेनी पड़ सकती है। शेष | पेज 10 पर 2036 तक मप्र में हर आठवां व्यक्ति होगा बुजुर्ग : यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (यूएनएफपीए) और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (आईआईपीएस) की ‘इंडिया एजिंग रिपोर्ट’ के मुताबिक 2036 तक मध्यप्रदेश की आबादी में 60+ लोगों की हिस्सेदारी 12.8% हो जाएगी। यानी लगभग हर आठवां व्यक्ति बुजुर्ग होगा। रिपोर्ट में युवाओं के बड़े शहरों और विदेश जाने से बुजुर्गों के पारंपरिक पारिवारिक सहारे पर पड़ रहे असर का भी जिक्र है। ‘लासी’ और एनएसएसओ के सर्वे भी अकेले या केवल बुजुर्ग सदस्यों वाले परिवार बढ़ने की ओर संकेत करते हैं। देश में 60+ उम्र के 35.4% बुजुर्ग ‘एम्प्टी नेस्ट’ श्रेणी में हैं, जबकि शहरी मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 31.4% है। मप्र में बुजुर्गों का हाल उच्च रक्तचाप 31.5% मधुमेह से पीड़ित 18.7% बुजुर्गों को दो बीमारियां 38.2% स्वास्थ्य बीमा नहीं 74% महिलाएं दूसरों पर निर्भर 46% प्रतिमाह 3800, 6500 का खर्च दवाओं पर (इंडिया एजिंग रिपोर्ट के अनुसार) पहले ऐसे घर पहचानें, फिर मदद का नेटवर्क बनाएं... मतदाता सूची के आधार पर पूरे शहर में ऐसे घर चिह्नित किए जा सकते हैं। पुलिस, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग इनका रिकॉर्ड तैयार करें। बुजुर्गों की सहमति से परिजन का संपर्क नंबर लेकर उन्हें नजदीकी अस्पताल, एंबुलेंस, पुलिस, कॉलोनी समिति से जोड़ा जाए। इससे वार्ड स्तर पर ऐसा नेटवर्क बन सकेगा, जो आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाए।, प्रो. आशा शुक्ला, समाजशास्त्री, पूर्व कुलगुरु बीआर आंबेडकर विवि, महू अरेरा, साकेत नगर और ईदगाह हिल्स में ये स्थिति

मूल लेख पढ़ें

यह खबर bhaskar.com से ली गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए बटन पर क्लिक करें।

पूरी खबर पढ़ें

और पढ़ेंस्वास्थ्य

सभी देखें →